27 दिस॰ 2022

शेयर बाजार गैप अप या गैप डाउन क्यों ओपन होता है?

 बहुत ही अच्छा प्रश्न है जो ज्यादातर उन निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करता है जो बाजार में बिल्कुल नए हैं और शेयर बाजार को ज्यादा अच्छे से नही समझते तो बताना चाहूँगा कि पहली बात तो शेयर बाजार में शेयरों के भाव अपने आप तय नहीं होते इन्हें वे लोग जो शेयरों में खरीद बेच करते हैं नियन्त्रित करते हैं इसे एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए कोई कंपनी x है जिसके शेयर मे किसी दिन बेचने वाले लोगों की अपेक्षा खरीदने वाले लोगों की संख्या और मात्रा अधिक रही तो उस दिन उस शेयर का भाव बढ़त के साथ होगा ठीक इसी प्रकार खरीदने वाले लोगों की संख्या और शेयरो की मात्रा कम रहने पर शेयर गिरावट पर बंद होगा.

यह तो बात हो गई कि कोई शेयर बढ़त के साथ बंद होगा या गिरावट के साथ अब आते हैं मूल प्रश्न पर कि दूसरे दिन शेयर अपने पिछले वाले भाव पर क्यों नहीं खुलता है जिस भाव पर वह पिछले दिन बंद हुआ था तो आपको यहां यह समझना चाहिए कि शेयर बाजार का खुलने का एक समय होता है ठीक उसी समय वह ओपन होता है इसमें बाजार खुलने से पहले 15 मिनट का समय दिया जाता है जिससे पहली 7 या 8 मिनट बाजार के शेयरों के भाव सेटल होने के लिए और बाद का time खरीदने बेचने की रणनीति बनाने के लिये. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि शुरुआत के जो 7 या 8 मिनट होते हैं वो शेयरों में खरीदने - बेचने के ऑर्डर लगाने के लिए दिए जाते हैं वो इसलिए दिया जाता है कि मान लीजिए आप के प्रश्न के हिसाब से शेयर बाजार को पिछले दिन की क्लोजिंग पर ही ओपन करना है तो इससे क्या होगा कि जैसे ही बाजार ओपन होगा सभी लोग उसी प्राइस पर खरीदी बेची करना चाहेंगे जिससे उस stock और पूरे शेयर बाजार में जाम की स्थिति पैदा हो जाएगी और बाजार में सर्किट लग जाएगा और trading बंद करने की नौबत भी आ सकती है इसलिए लोगों को एक प्री ओपनिंग सेशन के द्वारा अपने stocks के भाव फिर से तय करने का एक मौका दिया जाता है जिसे ही प्री ओपनिंग सेशन कहते हैं जब भी यहां तक की चलते हुए बाजार में भी अगर बाजार बंद करने की नौबत आए तो शुरू करने से पहले प्री ओपनिंग सेशन करना जरूरी होता है ताकि पता चल सके उस समय पर ज्यादातर लोग किसी stock का क्या भाव तय करना चाहते हैं क्योंकि शेयर बाजार में पुराने भाव महत्व नहीं रखते हैं समय के साथ सेंटिमेंट बदलते रहते हैं .

उम्मीद करता हूं इस जवाब से आपको पूरी तरह से संतुष्टि मिली होगी

शेयर बाजार में शुरुआत कैसे करें?

 हमारे यहां एक दोहा बहुत मशहूर है

काल करे सो आज कर ,आज करे सो अब

पल में परलय होएगा बहुरि करेगा कब ।

अर्थ किसी को बताने की आवश्यकता नही है। हम किसी अच्छे कार्य को करना तो चाहते है लेकिन उस पर विचार करते - करते वर्षों गँवा देते है जब समय हाथ से निकल जाता है तब समझ मे आता है कि ये हमने पहले क्यों नही शुरू किया , खैर कोई बात नही जागो तभी सवेरा मान सकते है।

अब समय आ गया है जो लोग अभी तक विचार ही कर रहे है कि वे भी अपना डिमैट अकाउंट खुलवाये और स्टॉक इंवेस्टिंग शुरू करे उनकी यात्रा को आसान करने के लिए मैं इस यात्रा का पहला कदम आपके लिए लाया हूँ क्योंकि आप थ्योरी कितनी ही पढ़ लीजिए जब तक प्रेक्टिकल नही करेंगे कुछ भी समझ मे नही आएगा।

मुझे पता है कि नए निवेशकों के लिए शेयर बाजार में निवेश करना एक बहुत ही मुश्किल भरा निर्णय होता है इसलिए अब ज्यादा सोच विचार करना बंद कर दीजिए और अपनी यात्रा का श्रीगणेश कर दीजिए।

नए निवेशकों को सीधे शेयर बाजार में निवेश करना भी नही चाहिए उनके लिए म्यूच्यूअल फण्ड का रास्ता बनाया गया है। म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाजार में निवेश करने का एक नायाब रास्ता है । इसमें नए निवेशको के मन मे जो मार्केट के उतार चढ़ाव की वजह से जो अनिश्चितता होती है वह बिल्कुल खत्म हो जाती है । आप निश्चिंत होकर निवेश कर सकते है आपको उतार चढ़ाव का बिल्कुल भी आभास नही होगा। मैं आपको एक म्यूच्यूअल फण्ड की स्कीम के बारे में बताऊंगा जो सभी प्रकार के निवेशको के लिए खास कर नए निवेशको के लिए तो वरदान से कम नही है इसमें आप कम से कम 1000 रु प्रति महीने वाली एक SIP शुरू कर सकते है आपके सेविंग अकाउंट से यह रकम हर महीने कट करके म्यूच्यूअल फण्ड में जमा होती जाएगी और मार्केट ऊपर जा रहा है या नीचे आ रहा आपको कुछ भी फर्क नही पड़ेगा , आप निश्चिंत रहेंगे ।

15 दिस॰ 2022

Top 20 best stock for investing

 अगर आप लंबे समय तक स्टॉक मार्केट में रहना चाहते है और बार बार स्टॉक नही बदलना चाहते तो आपको इस प्रकार के स्टॉक्स में रहना चाहिए जिनमे रिस्क ना के बराबर हो और रिटर्न्स ठीक ठाक हो , इस प्रकार के कुछ स्टॉक्स में आप इन top 20 best stocks को शामिल कर सकते है

1. Asian Paints

2. Pidilite

3. Infosis

4. TCS

5. Hdfc Bank

6. Icici Bank

7. Hdfc Ltd

8. Hindustan Unilever

9. Nestle India

10.Berger paints

11. Dabur

12. Divis Lab

13. Bajaj Finance

14. Bajaj finserve

15. Reliance industries

16. Relaxo footwear

17. Muthoot Finance

18. Dmart

19. Titan

20. L&T Infotech

तो ये top 20 best stocks कंपनियां ऐसी नही है कि दो चार साल में बंद हो जाएगी या बर्बाद हो जाएगी बल्कि रिस्क फ्री और एवरेज से ज्यादा ही रिटर्न्स देने वाली भारत की टॉप मोस्ट कंपनियां है ।

शेयर बाजार में पैसे लगाना क्यों जरूरी है?

 अगर आप इक्विटी इन्वेस्टमेंट नहीं करते हैं तो आप एक बेहतर तरीके से वेल्थ क्रिएशन का मौका गंवा रहे हैं। शेयर बाजार को जुआ समझकर उसकी अनदेखी करने से भी कोई फायदा नहीं होगा। इससे वेल्थ क्रिएशन का शानदार मौका हाथ से निकल जाता है।


हर इंसान को शेयर बाजार में पैसे लगाना पसंद नहीं है। कुछ को लगता है कि इससे कोई फायदा नहीं होता। कुछ इसे जुआ मानते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि शेयर बाजार में पैसा आसानी से बन जाता है। इसलिए वे इसे शक की नजर से देखते हैं। कुछ को लगता है कि शेयर बाजार में निवेश पर रिटर्न की गारंटी क्यों नहीं होती? कुछ को बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट इतना पसंद है कि वे इक्विटी में निवेश की माथापच्ची से दूर रहना चाहते हैं। ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें शेयर बाजार बहुत पसंद है। यह बात और है कि उन्हें इसकी बिल्कुल भी समझ नहीं है।इक्विटी इन्वेस्टिंग की असल स्टोरी एक दूसरे से बिल्कुल अलग ध्रुव वाली इन सोच के कहीं बीच की है। बिना सोचे-समझे ट्रेडिंग करने से कोई भी अमीर नहीं बन सकता। अगर आप बार-बार मुनाफे के लिए किसी ट्रिक का इस्तेमाल नहीं कर सकते तो उसका कोई मतलब नहीं है। शेयर बाजार को जुआ समझकर उसकी अनदेखी करने से भी कोई फायदा नहीं होगा। इससे वेल्थ क्रिएशन का शानदार मौका आपके हाथ से निकल जाता है। इक्विटी में पैसा लगाने वाले आम निवेशकों को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।

पहला, शेयर में निवेश करना, किसी बिजनस में निवेश करने जैसा है। इसमें यह पता लगाना मुश्किल है कि कंपनी का भविष्य कैसा होगा। इसलिए इक्विटी इन्वेस्टमेंट जोखिम भरा और रोमांचक होता है। दूसरा, अक्सर आपको ऐसी कहानियां सुनने को मिलेंगी कि किस तरह से फलां शख्स ने शेयर बाजार में मामूली रकम लगाकर शुरुआत की थी और आज वह करोड़पति या अरबपति है। यह सिक्के का एक पहलू है। पिछले वर्षों में किसी कंपनी के शेयर प्राइस में हैरतअंगेज बढ़ोतरी पर फिदा होना आसान है, लेकिन अगर आप किसी स्मार्ट इन्वेस्टर से बात करें तो वह बताएगा कि बाजार से पैसा बनाने में उसने कैसे-कैसे उतार-चढ़ाव देखे हैं। अगर किसी का एक निवेश सफल होता है तो कई शेयरों में उसे असफलता भी मिली होती है। वह यह भी बताएगा कि उसे फलां शेयर से इतने रिटर्न की कतई उम्मीद नहीं थी।


तीसरा, स्टॉक चुनने का कोई आसान तरीका नहीं है। इससे कई पहलू जुड़े होते हैं। आपको पता नहीं होता कि आगे चलकर इनमें से कौन इंपॉर्टेंट बन जाएगा और किन फैक्टर्स का बिल्कुल भी असर नहीं होगा। जिन लोगों ने स्टॉक ऐनालिसिस में पूरी जिंदगी खपा दी है, उन्हें पता होता है कि किसी सफल स्टॉक में क्या होना चाहिए। वे किसी कंपनी से जुड़े खतरे को भांप सकते हैं, लेकिन पक्के तौर पर वे भी किसी शेयर के मल्टीबैगर होने का डंका नहीं पीट सकते क्योंकि वे इस बारे में स्योर नहीं होते। उन्हें पता होता है कि किसी शेयर को चुनने में गलती हो सकती है। इसलिए वे विनम्र होते हैं और चुप रहते हैं। इसलिए आपको जो भी टिप मुफ्त में मिल रही हो, उसे इग्नोर करिए।

चौथा, कौन सा शेयर खरीदना चाहिए? यह फैसला मुश्किल होता है। स्टॉक एक्सचेंजों पर हजारों शेयर लिस्टेड हैं। किसी को नहीं पता होता कि इनमें से कौन सा मल्टीबैगर साबित होगा और उसमें कितना वक्त लगेगा। निवेशक स्टॉक चुनने का अपना स्टाइल डिवेलप करते हैं। आप कोई शेयर क्यों खरीद रहे हैं, इसे लिखिए। इसके बाद उसके परफॉर्मेंस को ट्रैक करिए। इससे पता चलेगा कि आपने जो सोचकर शेयर खरीदा था, वह सोच सही साबित हुई या नहीं। एक ट्रेडर प्राइस टारगेट तय करता है। शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर के साथ समयसीमा की पाबंदी होती है, लेकिन वैल्यू इन्वेस्टर हमेशा मार्जिन ऑफ सेफ्टी पर ध्यान देता है।


पांचवां, इन्फॉर्मेशन और ऐनालिसिस में एक आम निवेशक के हाथ बंधे होते हैं। ब्रोकरेज हाउस इसके लिए खास लोगों को हायर करता है। वह डेटाबेस तैयार करता है। रिसर्च पर पैसे खर्च करता है। वह स्टॉक्स को ट्रैक करता है और रिपोर्ट्स बेचता है। एक आम निवेशक सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर किसी शेयर का विश्लेषण कर सकता है। गंभीरता से स्टॉक रिसर्च करने वाले अक्सर दूसरों के साथ मिलकर काम करते हैं। वे रिसर्च की लागत मिलकर उठाते हैं। स्टॉक्स पर चर्चा करते हैं। आप ऑनलाइन चैट फोरम और टीवी प्रोग्राम को रिसर्च मानने की भूल न करें। शेयर बाजार से पैसा बनाने के लिए आपको गंभीरता से रिसर्च करने के लिए तैयार रहना चाहिए।


छठा, बाजार से पैसा एक शेयर से नहीं बनाया जा सकता। बिजनस की दुनिया में भी हर शख्स जेफ बेजोस या बिल गेट्स नहीं हो सकता। ऐसे बहुत कम लोग हैं, जो एक कंपनी या बिजनस पर अपना सबकुछ न्योछावर कर सकते हों। हम कई शेयरों में निवेश करते हैं और यही ठीक भी है। इस बात का ध्यान रखिए कि आप एक पोर्टफोलियो तैयार कर रहे हैं। आप इस पर ध्यान दीजिए कि किस कंपनी में कितना पैसा लगाना है। अगर आप बहुत अधिक शेयरों में मामूली रकम लगाते हैं तो आप अमीर नहीं बन सकते। याद रखिए कि आज दुनिया के सर्वाधिक अमीर लोगों की लिस्ट में आपको कई इक्विटी इन्वेस्टर मिलेंगे।

29 नव॰ 2022

शेयर बाजार क्यों है जरूरी/ why stock market is necessary

  शेयर बाजार में क्यों लगाना चाहिए पैसा?                                  एक्सपर्ट कहते हैं कि इक्विटी में लगा पैसा किसी दूसरे एसेट में लगे पैसे की तुलना में तेजी से बढ़ता है. लेकिन आमतौर पर वे यह नहीं बताते हैं कि ऐसा क्यों है? आज हम आपको बता रहे हैं निवेश करने वाले अधिकतर लोग मानते हैं कि लगातार बढ़ती महंगाई दर को मात देने के लिए निवेश का सबसे अच्छा साधन इक्विटी (शेयर मार्केट) है. एक्सपर्ट कहते हैं कि इक्विटी में लगा पैसा किसी दूसरे एसेट में लगे पैसे की तुलना में तेजी से बढ़ता है. एक्सपर्ट्स इक्विटी के पुराने रिटर्न को देखते हुए ऐसा कहते हैं, लेकिन अधिकतर लोग इस बात पर आंखें मूंदकर भरोसा कर लेते हैं. वे यह नहीं पूछते कि इस बात की क्या गारंटी है कि यदि इतिहास में अच्छा रिटर्न दिया है तो भविष्य में भी अच्छा रिटर्न मिलेगा ही?यह सवाल पूछना जरूरी इसलिए है ताकि आपको इसका जवाब मालूम हो. इस प्रश्न का उत्तर जानकर आप यकीनन एक अच्छे निवेशक बन जाएंगे और आपकी वेल्थ के बढ़ने के चांस भी बढ़ जाएंगे.                                                                                      हम स्टॉक मार्केट की बात कर रहे हैं तो यहां इसका मतलब ब्रॉड मार्केट इंडेक्स से समझा जाए. इंडेक्स कुछ स्टॉक्स की एक बास्केट की तरह हैं, जो ओवरऑल शेयर मार्केट का प्रतिनिधित्व करते हैं. कह सकते हैं कि इनकी चाल से पूरे बाजार की चाल समझी जा सकती है. तो हम आपको बता रहे हैं मूल सवाल के जवाब, जिसे लोग अक्सर पूछते नहीं है.      मुद्रास्फीति या महंगाई

जैसे-जैसे चीजों की कीमतें बढ़ती हैं, वैसे-वैसे उन चीजों को बनाने वाली कंपनियों के रेवेन्यू और प्रॉफिट भी बढ़ता है. इसके साथ ही कंपनी के स्टॉक की वेल्यू भी बढ़ती है. इसे यूं भी समझा जा सकता है कि स्टॉक इंडेक्स के स्तर के ऊपर जाना एक तरह से इन्फ्लेशनरी ग्रोथ ही है. महंगाई भी एक कारण है कि व्यक्ति को निवेशक बनना चाहिए न कि केवल बचतकर्ता (Saver). एक निवेशक के तौर पर आपके एसेट की कीमत भी मुद्रास्फीति के साथ-साथ बढ़ती है, परंतु एक बचतकर्ता का पैसा बढ़ता नहीं है.                                                                       जनसंख्या वृद्धि

बढ़ती जनसंख्या का मतलब आमतौर पर कंपनियों के लिए एक बड़ा योग्य बाजार होता है. और जो कंपनियां अपने बड़े और बढ़ते बाजार को सफलतापूर्वक सामान बेचती हैं, समय के साथ वे और अधिक मूल्यवान हो जाती हैं.                                                                                  टेक्नोलॉजी का बढ़ता दायरा

आंकड़ों के आधार पर भी कहें तो जितने ज्यादा लोग होंगे, उतने ही अधिक जीनियस और अविष्कार करने वाले सामने आएंगे. जैसे कि वैश्विक जनसंख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे इन्सान की तरक्की और अविष्कारों की गति भी तेज हो रही है. और इसी के आधार पर कंपनियों का प्रॉफिट भी लगातार अच्छा हो रहा है, क्योंकि टेक्नोलॉजी के बिना इतनी बड़ी जनसंख्या को हर पक्ष से मैनेज करना मुश्किल है.                 स्टॉक की नेचुरल सिलेक्शन

एक इंडेक्स में आमतौर पर बाजार की बड़ी और बेहतरीन कंपनियां शुमार होती हैं. यदि कोई कंपनी क्वालिफिकेशन क्राइटेरिया में फेल होती है तो उसे इंडेक्स से बाहर करके किसी दूसरी बेहतरीन कंपनी को इंडेक्स में शामिल कर लिया जाता है. ऐसे में निवेशक को विशेष तौर पर स्टॉक चुनने की कोई टेंशन नहीं रहती, क्योंकि यह एक नेचुरल सिलेक्शन है, जो हमेशा आउटपरफॉर्म करता है.


लम्बे समय में जोखिम भी देते हैं लाभ

यदि आप शार्ट टर्म के लिए बाजार में पैसा डालते हैं तो आपको नुकसान होने की संभावना रहती है, लेकिन यदि आप लम्बी अवधि के लिए फाइनेंशियल मार्केट में पैसा लगा रहे हैं तो आपको फायदा ही होगा. चूंकि शार्ट टर्म में जोखिम होता है तो लॉन्ग टर्म में आपको उस जोखिम के बदले में प्रीमियम मिलता है. इसे बाजार की भाषा में रिस्क प्रीमियम कहा जाता है.                                                                              सेंट्रल बैंक की भूमिका

जब इकॉनमी में जरूरत से अधिक महंगाई पैदा होती है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ब्याज दरों में इजाफा करके इसे शांत करने की कोशिश करता है, जिससे कि मुद्रास्फीति नियंत्रण में आ जाती है. इसके उलट, जब अर्थव्यवस्था लड़खड़ाती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को कम कर देता है, जिससे लोग ज्यादा खर्च करते हैं और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं. मतलब, अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी करता है.                                                          नीचे जाने के बाद बाजार ऊपर क्यों आता है?

बाजार में बिकवाली, डाउन ट्रेंड, क्रैश से सबको डर लगता है. ये हर बाजार चक्र का हिस्सा हैं. आते हैं और गुजर जाते हैं. ये सदा के लिए टिकाऊ नहीं हो सकते. लेकिन क्यों? इसके कुछ कारण है-

सरकार एक्शन लेती है. जब-जब इकॉनमी में कुछ बुरा होता है तो सरकार और RBI कुछ ऐसे कदम उठाते हैं, जो इकॉनमी को संकट से उबारने का काम करते हैं.

मार्केट्स इकॉनमी के भविष्य के लिए बैरोमीटर की तरह काम करते हैं. यदि बाजार को हमेशा गिरना ही है तो कंपनियों को अपने धंधे बंद कर देने में ही फायदा होगा. लेकिन ऐसा नहीं होता. कंपनियों से बेहतर बाजार को कोई नहीं जानता. कंपनियां लगातार काम करती हैं, इसका मतलब है कि बाजार हमेशा मंदी में नहीं रहता.

ग्रीड का फैक्टर भी काफी काम करता है. जब-जब शेयर बाजार में गिरावट आती है तो बहुत बड़ी संख्या में लोग इसकी तरफ आकर्षित होते हैं. यह एक तरह से डिस्काउंट सेल जैसा मौका होता है. लोग गिरे हुए अच्छे शेयर्स या इंडेक्स में पैसा लगाते हैं और जब बाजार उठता है तो उन्हें लाभ होता है.जितना लम्बा टिकेंगे, जीतने के चांस उतने ज्यादा!

भारतीय इक्विटी मार्केट का इतिहास कहता है कि इसने लगभग 16 फीसदी का सालाना कम्पाउंडेड एवरेज रिटर्न दिया है. बाजार में समय कैसे निवेशक को फायदा पहुंचाता है, उसे एक डेटा से समझना चाहिए. पिछले 33 वर्षों के सेसेंक्स के आंकड़े बयान करते हैं कि 15 फीसदी सालाना रिटर्न पाने के लिए यदि आप 1-2 साल तक टिकते हैं तो आपके चांस 50 फीसदी होते हैं. यदि आप 7 साल के लिए निवेश में बने रहते हैं तो सालाना आधार पर 15 फीसदी रिटर्न पाने के चांस बढ़कर 66 फीसदी हो जाते हैं. इसी तरह 15 साल तक टिके रहने की स्थिति में चांस 70 फीसदी बन जाते हैं.

15 मई 2021

बेरोजगारी दूर करने और Early रिटायरमेंट का शानदार विकल्प शेयर बाजार

 साथियो आज मैं आपको इन्वेस्टमेंट की एक बहुत ही अच्छी बात बताना चाहता हूँ जो ज्यादातर लोग नहीं जानते और सरकार को और अपने आप को कोसते रहते है । 

इसे हम एक उदहारण से समझने की कोशिश करते है मान लिजिए कि रवि नाम का एक नौजवान युवा है और उसकी उम्र 20 साल है उसने स्नातक तक की पढ़ाई की है और कोई प्राइवेट जॉब करता है जिसमे उसे 20000 रु प्रति माह सेलेरी मिलती है जो की ठीक ठाक  कही जा सकती है । इसमे से वह प्रति माह 10000 रु म्यूच्यूअल फंड या शेयर बाजार मे निवेश करता है जिसकी उसे ठीक ठाक समझ है  और हम मान कर चलते है कि उसे लगभग 18% की चक्रवर्ती दर से भी रिटर्न मिलता है तो गणना करने पर 20 वर्ष बाद जब वह 40 साल का हो जाता है तो जो राशि निकल कर आती है वो आपको दांतो तले अंगुली दबाने को मजबूर कर देगी, आप विश्वास ही नहीं करेंगे कि 20 वर्ष बाद उसे जो रकम हाथ लगेगी वह बढ़ करके 21034871.86 रु हो जायेगी। जो कि एक सरकारी कर्मचारी को भी रिटायरमेंट के समय शायद नहीं मिलती होगी और वो भी 60 साल की उम्र मे , रवि को तो ये 40 साल की उम्र मे ही मिल रही है। ऐसे मे मुझे तो कम से कम यही लगता है कहीं ना कहीं सिस्टम मे कुछ तो खामी जरुर है जिसकी वजह से हम सिस्टम को कोसते रहते है । कई लोग तो 40 साल की उम्र  सिर्फ सरकारी नौकरी पाने मे ही निकाल देते है उनको रवि से सिखने की जरुरत है। साथियों म्यूच्यूअल फंड या शेयर बाजार से पैसा कमाना कोई रोकेट साइंस नहीं है कोई भी आम निवेशक यह कर सकता है।

शेयर बाजार मे तनाव मुक्त रहने का फंडा

 साथियों कई नये लोगों का मानना कि बाजार अभी बहुत बढ़ चुका है और वो निवेश करेंगे तो उनकों नुकसान हो सकता है तो मैं उनकों यह बताना चाहूँगा कि बेशक बाजार मे एक जोरदार तेजी पिछले 7-8 महिनों से आयी है और यह इन स्तरों पर काफी बढा हुआ भी लगता है लेकिन ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जो यह कह सके कि अब बाजार ऊपर जायेगा या नीचे आयेगा ऐसा पूर्वानुमान लगाना सम्भव नहीं है तो फिर हम क्या करे, यदि हमारा बाजार मे निवेश है तो क्या exit कर ले या नया निवेश करना है तो अभी करे या रुके।

इन सब परेशानियों का एकमात्र हल यह है कि हमे कभी भी सम्पूर्ण निवेश एक साथ नहीं करना चाहिए बल्कि बाजार ऊपर जा रहा है या नीचे आ रहा है इसका तनाव ना लेते हुए मासिक रुप से एक निश्चित निवेश करते रहना चाहिये,Exit करना हो भी इसी प्रकार मंथली ही करना चाहिये इससे बाजार के उतार चढ़ाव का कोई फर्क नहीं पदेगा और आप हमेशा तनाव मुक्त ही रहेंगे।

Risk Management in Stock Market

 नमस्कार साथियों 

 कहीं न कहीं आपके मन  मे यह बात जरुर है कि शेयर बाजार के बारे मे जो कुछ भी हम जानते है वो ऊँट के मुंह मे जीरे के समान है यह वैसा नहीं है जैसा हमारा समाज हमारा आस पास का वातावरण हमे बताता है बल्कि ये उससे अलग है जो हमे कोई नहीं बताता। दुनिया मे हर चीज मे रिस्क होता है हर काम मे रिस्क होता है हम आये दिन सडकों पर देखते है सैकड़ो गाडिय़ों के ऐक्सीडेंट होते है बस ऐक्सीडेंट, ट्रेन ऐक्सीडेंट और यहाँ तक कि हवाई जहाज भी क्रेश हो जाते है। जब हमे पता होता है कि ये चीजे कभी भी क्रेश हो सकती है फिर भी हम इनमे बैठकर यात्राएँ करते है क्या कोई व्यक्ति ऐसा है जो ये सब नहीं करता,यहाँ तक की पैदल चलने वाला भी इसका शिकार होता है फिर भी वो चलता है क्योकिं वो रिस्क उठाता है ।

मुझे एक बात बताईये जब वास्कोडि गामा भारत की खोज के लिये निकला था तो क्या उसको मालूम था कि भारत किधर है, नहीं ना फिर भी उसने रिस्क उठाया और अपनी मंजिल को पाया। किसान को नहीं मालूम होता कि उसकी फसल अच्छी होगी या नहीं  फिर भी वो रिस्क उठाता हैऔर खेती करता है। हम कोई भी बिज़नेस करते है कोई भी धन्धा करते है शुरु करने से पहले ही क्या हमे पता होता है कि हम कामयाब होंगे फिर भी हम रिस्क उठाते है और उसमे जी जान लगाते है। यह अलग बात है कि हम उसमे कामयाब होंगे कि नहीं। यदि हम यात्रा  शुरु ही नहीं करेंगे यानी हम रिस्क लेंगे ही नहीं तो कहीं पहुंचने का तो सवाल ही नहीं है। मंजिल खुद चलकर हमारे पास नहीं आई हमे ही उसके पास जाना पड़ा।

साथियों निवेश करने के तीन विकल्प होते है पहला है सोना जिसमे हमारे पूर्वज और बड़े बुजुर्ग निवेश किया करते थे जिसमें रिस्क बिल्कुल नहीं होता था , शायद आज भी नहीं है और आगे भी नहीं रहेगा।

दुसरा है जमीन जायदाद मे निवेश इसमे रिस्क सोने से थोड़ा ज्यादा है परन्तु बहुत ज्यादा है ऐसा भी नहीं है यह हमारे जमाने का निवेश है जिसमे हम अक्कसर निवेश कर अपने आप पर बहुत इतराते है कि आने वाला समय हमारा होगा । बेशक सोना और प्रॉपर्टी निवेश के अच्छे विकल्प है और हमेशा रहेंगे परन्तु निवेश का एक तीसरा विकल्प भी है जो न तो हमारे जमाने का है और न ही हमारे पूर्वजो के जमाने का , ये है भविष्य का निवेश  इसमे हम जो पेड़ लगायेंगे वो हमे और आने वाली पीढ़ी को फल देगा।

जी हाँ साथियों  शेयर बाजार एक ऐसा ही निवेश का विकल्प है जिसमें हमे नहीं मालूम होता कि भविष्य में क्या फल मिलेंगे फिर भी हम रिस्क उठाने को तैयार हो जाते है । क्योकिं इतिहास गवाह है जिसने भी रिस्क उठाया हैअपने सपनो को पूरा करने के लिये आने वाली बाधाओं की परवाह न करते हुए कदम बढाया है सफलता उसके स्वागत को तैयार खड़ी मिली है।

धन्यवाद।

कोरोना को अवसर मे बदलने का समय आ गया है

 साथियो जैसा कि आप को मालूम है गत वर्ष से corona जैसी महाभयंकर वैश्विक महामारी ने सम्पुर्ण विश्व को  अपने आगोस मे लिया हुआ है जिसमे सभी देश यह मान रहे है कि इस महामारी के पीछे चाइना का हाथ है लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे है। इस वजह से सभी देशो ने चाइना से अपने रिलेशन तोड़ने शुरु कर दिये विदेशी कम्पनियाँ चाइना छोड़ कर अन्य देशो का रुख कर रही है इससे भारत को बहुत फायदा होगा क्यौंकि इनमे से ज्यादातर कम्पनिया भारत मे ही आयी है और आ रही है क्यौंकि चाइना की साख बहुत गिर चुकी है। भारत सरकार ने भी चाइना से आयात बिल्कुल बन्द कर दिया है इसमे आप सोच सकते है कि हमारा कितना बड़ा फायदा है।हमारी कई कंपनीया सस्ते चाइनिज माल की वजह से घाटे मे चल रही थी अब चाइना से Imprort बन्द होने से उनके अच्छे दिन आ गये है तभी तो आपने देखा पिछले 10-12 महिनो से फार्मा और केमिकल कम्पनियो को जबर्दस्त मुनाफा हो रहा है और उनके शेयर price 3- 4 गुना हो चुके है इसी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने वाली कम्पनियो के शेयर price बढे है। इसी क्रम मे भारत सरकार ने इन इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने वाली कम्पनियो खासकर contract मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कम्पनियों के लिये एक स्कीम लौन्च की है जिसका नाम है Prodution linked incentive scheme (PLI)इसमे इन कम्पनियों को विशेष छुट  मिलेगी जिससे इनकी लागत कोस्ट बहुत ही कम रह जायेगी जो इनके लिये गेमचेंजर साबित होगा।अभी फिलहाल भारत मे ऐसी दो ही कम्पनिया है जो कॉन्टैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करती है इन्हे PLI स्कीम का जबरदस्त बेनिफीट होगा और अगले कई सालो तक होता रहेगा। तो समझदार लोग समझ गये होंगे कि मै किन कम्पनियों की बात कर रहा हूँ जी हाँ मै बात कर रहा हूँ Dixon Technology और Amber Enterprizes की जिन्हे आप जब भी मार्केट मे गिरावट हो खरीद कर अपने पोर्टफोलियो मे add कर सकते हो क्योकिं ये बहुत ही लम्बी रेस के घोड़े साबित होने वाले है हालांकी अभी इनके शेयर प्राइस काफी हाई हो चुके है।

शेयर बाजार में लोगों के बर्बाद होने का क्या कारण हैं?

  साथियों  हम बिना कोई रिस्क लिये बिना कोई  Intraday ट्रेडिंग किये बिना कोई  f &o ट्रेडिंग किये सिर्फ positional bases पर delivery मे shares buy करके भी एक अच्छा मुनाफा कमा सकते है और चैन की नींद सो सकते है।

आप मे से कईयों को तो पता भी नहीँ होगा कि ये Intraday और f &o ट्रेडिंग किस चिड़िया का नाम है तो दोस्तो मै आप को बता दूँ कि ये एक बहुत ही खतरनाक और दिन के सुकून और रातो की चैन को छीनने वाला महारिस्की गेम है जिसमे आप को बहुत सारा नॉलेज और कई वर्षो का अनुभव चाहिये। कहते है ना कि शेयर बाजार जुआ होता है और इसमे बर्बाद हो जाते है उसमे इसी Segment का सबसे ज्यादा हाथ होता है। नये नये लोगो को लगता है कि शेयर बाजार तो सोने की चिड़िया है यहाँ रातोरात अमीर बन सकते है करोड़पति बन सकते है करोड़पति का तो पता नहीं परंतु रोडपति जरुर बन सकते है।

Intraday और f &o मे क्या होता है कि इसमे आप कोई शेयर खरीदते है तो आपका broker आपको लिव्रेज देता है यानी आपके पास मान लिजिये  कि 10000 रु है तो भी आप 50000 या 100000 रु  के shares खरीद सकते है ये आपके ब्रोकर पर depend करता है की वो आपको कितना लिव्रेज देता है। यहाँ जो भी प्रॉफिट या लॉस होगा वो 10000 पर नहीं होकर 50000 या 100000 जितना लिव्रेज आपको मिलता है उस पर होगा तो हुआ ना ये महारिस्की गेम।

मेरा अनुभव यह कहता है कि नये लोगो और खासकर नौकरीपेशा और काम धन्धे वाले लोगो जिनके पास शेयर मार्केट को देने के लिये पूरा समय नहीं होता है ऐसे लिव्रेज(intraday व f &o) वाले काम नहीं करने चाहिये जिसमे एक समयावधि मे आपको शेयर मे से exit करना पड़ता है बाकी मर्जी है आपकी क्योकि पैसा है आपका।

धन्यवाद।

शेयर बाजार के लिए कौनसा चश्मा सही है ?

 साथियो कई लोग शेयर बाजार को बहुत हल्के मे लेते है और यह मानकर चलते है कि यहाँ पैसा बनाना बहुत आसान है तो यहाँ मे उनकी जानकारी के लिये बता दूं कि अगर आप शेयर बाजार को व्यापार के नजरिये से देखते है ट्रेडिंग करके पैसे कमाना चाहते है तो आप दुनिया के सबसे मुश्किल कामों मे से किसी काम को चुन रहे है। इसमे पैसे बनाने का मतलब है आग मे से पैसे निकाल रहे हो। मै आपको डरा नहीं रहा हूँ यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है जिसमे आपके सफल होने की सम्भावना मात्र 10% है खासकर तब जब आपके पास इसे देने के लिये फुल टाईम समय ही नहीं है। अगर आपके पर्याप्त समय नहीं है आप कोई जॉब करते है या खुद का बिज़नेस करते है तो मेरी सलाह यही है कि आपको इस पैसे बरसते हुए दिखने वाले मायावी व्यापार से दूर रहना चाहिये और शेयर बाजार को केवल निवेश के चश्मे से ही देखना चाहिये। अगर आपको अच्छी कम्पनियों का चयन करना आ गया तो आप लंबे समय अंतराल मे शेयर बाजार से वो सब कुछ हासिल कर सकते है जो आप इससे हासिल करना चाहते है यही एकमात्र फंडा है इसका कोई शोर्टकट नहीँ है।

ट्रेडिंग का मार्ग बहुत काँटो वाला है इसमें आपको कम से कम 10 साल का अनुभव चाहिये , एक बहुत ही व्यावसायिक मानसिकता की जरुरत होती है और अपना पूरा समय इसी को देना पड़ता है।

शेयर मार्केट की सच्चाई

 साथियों शेयर मार्केट एक ऐसा मार्केट है जिसमे लोगों की सामान्यतया यह धारणा बनी हुई है कि इसमे प्रॉफिट किस्मत से मिलता है और यह जुआ है जो बिल्कुल निराधार है बेबुनियाद है। इसमे भी निवेश के अन्य विकल्पो की भांती ही सोच समझकर निवेश करना होता है किसी भी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले उस कंपनी के बारे मे कई तरह की जानकारी जुटानी पड़ती है जैसे वह कंपनी क्या काम करती है उसको साल दर साल प्रॉफिट होता है या नहीं, कंपनी पर कर्जा कितना है कंपनी का मैनेजमेंट कैसा है क्या उसका बिज़नेस लम्बे वक्त तक चलने वाला है या नहीं उसमे ग्रोथ की भरपुर संभावनाए है या नहीं , इस प्रकार की कई चीजे हमे देखनी पड़ती है जो कि सभी प्रकार के निवेशो मे देखनी ही पड़ती है । हम कोई प्रॉपर्टी खरीदते है तो क्या बिना देखे बिना सोचे कहीं भी खरीद लेते है बिल्कुल भी नहीं  बल्कि कई सारी  चीजें देखते है जिन्हे बताने की जरुरत नहीँ है हम बाजार से कोई सामान लाते है तो उसे भी ठोक बजा कर लाते है फिर शेयर किसी ऐरी गेरी कंपनी का कैसे खरीद लेते है।ज्यादातर लोग ऐसा ही करते है वो लोग बिना किसी जानकारी के बिना किसी रिसर्च के सिर्फ टिप्स के आधार पर या दूसरो से सुन कर सिर्फ सस्ता देखकर बिना रिस्क Reward  देखे किसी भी कंपनी के शेयर खरीद लेते है फिर रोज हमेश उस पर टकटकी लगा कर बैठ जाते है और इन्तजार करते है कि कब ये शेयर ऊपर जायेगा और उनकी किस्मत चमकेगी,थक हार कर जब उनको बहुत लॉस हो जाता है  फिर भी उसको Sell नहीं करते और सारा दोष मार्केट को देते है सब से यही कहेन्गे कि उनकी तो किस्मत ही खराब है शेयर बाजार तो जुआ है सबने समझाया था पर मै ही नहीं माना और गंवा दिये अपने पैसे।

यह आम बात है इस मार्केट मे ।

शेयर मार्केट मे निवेश क्यों है जरूरी/ why is stock market necessary

 नमस्कार साथियों 

अभी तक आपने निवेश के बारे मे सोचा नहीं है या फिर बैंक FD और गोल्ड या प्रॉपर्टी के अलावा कहीं निवेश नहीं करते है तो मैं आपको करबध सलाह दूंगा कि कुछ निवेश शेयर मार्केट मे भी करना शुरु कीजिये। यह आपके बाकी निवेशों से कई गुना ज्यादा return देगा , इसके लिये पहला काम तो आपको यह करना होगा कि आपको अपने सोचने का नजरिया बदलना होगा शेयर मार्केट के बारे मे आपकी जो सोच बनी हुई है उसे बदलना होगा। मैं जानता हूँ कि यह इतना आसान नहीं है लेकिन असम्भव भी नहीं है।

आपको मालूम होना चाहिये कि दुनियाभर मे शेयर बाजारों कि स्थापना किसी व्यक्ति विशेष या किसी संस्था ने अपने निजी हित के लिये नहीं की है बल्कि अपने अपने राष्ट्र हित के लिये वहाँ कि सरकारों ने ही की है। किसी भी देश की सरकार अपने देश का बुरा कभी नहीं चाहती और यह माँग भी कभी नहीं उठी कि इस बाजार को बन्द कर दिया जाये यहाँ तक कि जब सारे संसार मे कोरोना की वजह से लोक डाउन लगा हुआ था तब कई देशों मे यह माँग उठी थी कि कुछ समय के लिये शेयर बाजार को बन्द कर दिया जाये, भारत मे भी यह माँग जोर शोर से उठाई गयी लेकिन भारत सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया और यह तर्क दिया गया कि शेयर बाजार को किन्ही गैर जरुरी सेवाओं  मे नहीं गिना जा सकता है बल्कि इसे आवश्यक सेवाओं मे माना तभी तो लोक डाउन मे जहाँ मैडिकल और हॉस्पिटल सेवाओं को छोड़कर बाकी सारा देश बन्द था वहाँ शेयर बाजार को एक मिनट के लिये भी बन्द नहीं किया गया था। चाइना कि बात अलग है वहाँ शार्ट सेलिंग बन्द की गयी थी पुरा मार्केट तो वहाँ भी बन्द नहीं हुआ।

साथियों आपको शायद मालूम नहीं होगा अमेरिका और यूरोपीय बाजारों के सामने अपना बाजार तो अभी बच्चा है यहाँ सिर्फ 3 से 4 प्रतिशत लोग ही शेयर बाजार मे निवेश करते है जबकि अमेरिका मे 47% और युरोप मे 41% लोगों का शेयर बाजार मे निवेश है बाकी विश्व की स्तिथि भी अपने देश से बेहतर है यह भी एक कारण है उन देशो के विकसित होने का। इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि अपना देश कमजोर है और उसकी growth कम रहने वाली है। पिछ्ले दशक से इंडिया ने बहुत तेजी से grow किया है और आने वाले वर्षों मे इसमे और भी ज्यादा तेजी आयेगी , वो दिन दूर नहीं है जब इंडियन ईकोनॉमी वर्ल्ड की सबसे fastest ईकोनॉमी बन जायेगी। आज जहाँ सम्पूर्ण विश्व मे गूगल , फेसबुक , Microsoft , अमेजोंन, अलिबाबा, Tesla, एप्पल जैसी कम्पनियों का बोलबाला है। इंडियन कम्पनियाँ भी इन ग्लोबल कम्पनियों को कड़ी टक्कर दे रही है एक दिन वह दिन भी आने वाला है जब हम गूगल पर सर्च नहीं करके किसी इंडियन कंपनी पर सर्च करेंगे, माइक्रोसॉफ्ट के वींडो की जगह इंडियन कंपनी के विंडो को use करेंगे, फेसबुक और वॉट्सएप्प पर Chat करने की बजाय इंडियन कंपनी पर करेंगे। ये सब होगा और बहुत जल्द हमे देखने को मिलेगा क्योंकि इन सब वैश्विक कम्पनियों को इंडिया जैसे विकासशील देशों की फास्ट ग्रोइंग कम्पनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है और इनका मार्केट लगातार  गिर रहा है। इसलिये मै आपको अपनी सोच मे बदलाव लाने के लिये प्रेरित कर रहा हूँ क्योंकि सारी दुनियां की नजर हम पर है तभी तो दुनिया की हर छोटी-बड़ी कम्पनी इण्डिया मे कारोबार करने के लिये उतावली है। आप को सिर्फ यह पता करना है कि वो कम्पनियाँ कौनसी हो सकती है जो गूगल फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट की जगह ले सकती है।

लालच और डर को जीतना ही कामयाबी का पहला कदम है

 क्या आप शेयर मार्केट में  invested है यदि नहीं तो क्या आपने इसके बारे में कभी सोचा है कि आपने शेयर मार्केट में इन्वेस्ट क्यों नहीं किया चलिए मैं बताता हूं ज्यादातर आम लोगों की भांति आप भी मानते हैं कि यह मार्केट एक जुआ है इसमें प्रॉफिट हो भी सकता है और नहीं भी , यह बड़े लोगों का काम है  लेकिन कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि यहां पर नुकसान क्यों होता है काफी सारे लोग बर्बाद क्यों होते हैं।

 थोड़ी देर के लिए शेयर मार्केट को भूल भी जाएं और आम जीवन के बारे में सोचें तो  क्या शेयर मार्केट के बाहर सभी क्षेत्रों में लोग कामयाब ही होते हैं जी नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है हमारे चारों तरफ ऐसे बहुत सारे व्यक्ति होते हैं जो अपने जीवन में कामयाब नहीं हो पाते कारण क्या

 कारण बहुत सारे हो सकते हैं व्यक्ति मेहनत करना नहीं चाहता और बिना मेहनत के ही अमीर बनना चाहता है भाग्य पर भरोसा ज्यादा करता है सोचता है भाग्य में लिखा होगा तो मिल जाएगा पाई पाई जोड़ने में विश्वास नहीं करता है लॉटरी लगने में विश्वास करता है शेयर बाजार में भी लोग सालों से यही करते हुए बर्बाद हुए है सिर्फ लोग ही नहीं कई संस्थाएं कई कंपनियां कई देश बर्बाद हुए हैं।

 शेयर बाजार में भी  किसी को लालच ने ,किसी को जल्द अमीर  बनने के ख्वाब ने तो किसी को किस्मत आजमाने ने बर्बाद किया है जो लोग शेयर बाजार में बर्बाद  हुए हैं यकीन मानिए अगर वो यहां बर्बाद नहीं होते तो कहीं और बर्बाद होते पर होते जरूर क्योंकि उनकी बुनियाद ही ऐसी है। क्या हमारी भी ऐसी है।


 आइए अब आते हैं आज के मुख्य बिंदु पर निसंदेह हम मेहनत करने वाले लोग हैं तो क्या हम बहुत सारी मेहनत करके अपनी जिंदगी का सारा पैसा एक ही दिन में कमा सकते हैं बिल्कुल नहीं तो फिर शेयर बाजार में इस प्रकार कमाने की कैसे सोच सकते हैं शेयर बाजार भी तो अन्य बाजारों की तरह एक बाजार ही है ना इसमें भी तो वक्त लगता है वक्त तो हमें देना ही पड़ेगा।  मैं यह नहीं कहता कि आपको इसके लिए बहुत सारी पढ़ाई करनी पड़ेगी, मार्केट का बहुत सारा ज्ञान अर्जित करना पड़ेगा, यह जरूरी है लेकिन आवश्यक बिल्कुल भी नहीं है आप कम नॉलेज में भी  मार्केट से ठीक-ठाक पैसा कमा सकते हैं बस आपके अंदर दो चीजें होनी चाहिए आपको लालच बिल्कुल भी नहीं करना है और डरना भी बिल्कुल नहीं है यह दो चीजें आपकी हो गई तो समझ लो जीत आपकी है क्योंकि संसार में कुछ भी निश्चित नहीं है सब कुछ अनिश्चित है क्योंकि लोगों को जब यह लगता है कि सब कुछ ठीक-ठाक है तो वह मार्केट में पैसे डालते हैं और जब यह लगने लगता है कि सब खत्म हो जाएगा तो अपना पैसा निकालने में देर नहीं करते इसी वजह से मार्केट ऊपर नीचे होता रहता है यह मार्केट का स्वभाव है हम और आप इस को बदल नहीं सकते फिर लालच और डर कैसा।

 मार्केट में हजारों प्रकार की कंपनियां है कुछ बहुत छोटी तो कुछ बहुत ही बड़ी  विशालकाय , हममे से लगभग सभी को पता है कि कौन सी कंपनी अच्छी है और कौन सी नहीं है फिर क्या कारण है कि  हम अच्छी कंपनियों में भी निवेश करने से डरते हैं।

 कारण सबको पता है सबको लगता है कि शेयर मार्केट क्रैश हो गया तो हमारा सारा पैसा बर्बाद हो जाएगा इतिहास गवाह है कि मार्केट क्रैश होने से किसी का पैसा बर्बाद नहीं हुआ है लोगों ने डर की वजह से खुद ही अपना पैसा बर्बाद किया है जब मार्केट बढ़ता है तो लालच में आकर बहुत सारा पैसा डाल देते हैं और वही मार्केट जब गिरने लगता है तो डर करके सारा पैसा निकाल लेते है इसी वजह से बर्बाद होते हैं। तो फिर किसका दोष मार्केट का या व्यक्ति का स्वयं का।

मार्केट ओवरवेल्यूड या अंडरवेल्यूड ?

 अभी के हालातों में एक्सपर्ट से एक्सपर्ट को भी यही लग रहा है कि बाजार शार्ट टर्म के लिए करेक्शन दिखा सकता है इसलिए सावधान रहना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह नही है कि मार्केट में लंबी अवधि के लिए कोई बड़ी गिरावट होने वाली है जो मार्च 2020 में देखने को मिली थी।

बाजार के सामने जब कोई नई समस्या आती है वह उस पर अपना रिएक्शन आने वाले समय को डिस्काउंट करके ही देता है जो मार्केट ने 2020 में ही आलरेडी कर लिया है फिर कोरोना मार्केट के लिए कोई नई घटना नही हैं। मार्च 2020 में मार्केट का 40% से अधिक गिरना यह आने वाले 5 से 7 वर्षो का कैलकुलेशन करके ही डिसाइड किया हुआ कदम है। अब कोई नई समस्या आ जाये तो उसकी बात अलग है। कोरोना आलरेडी डिकॉउंटेड है ।

मार्केट गिरेगा कब गिरेगा यह सिर्फ और सिर्फ उन लोगो के दिमाग की उपज होती है जो या तो नए नए है या लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स नही है। रही बात इकॉनमी के गिरने की तो सारे कंपनियों के तिमाही नतीजे एक से बढ़कर एक आ रहे है जीडीपी के आंकड़े और मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़े भी पिछले साल की तुलना में बेहतर ही आ रहे है तो इकोनॉमी कंहाँ गिर रही है। इकोनॉमी पिछले 2 साल से तो गिर ही रही थी अब तो उसके उठने का समय है । जिस प्रकार भारत समेत दुनिया भर के तमाम देशों ने इकोनॉमी में पैसा फूंका है उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है कि इकोनॉमी के अच्छे ही दिन आने वाले है। हम लोग याद करेंगे कि कभी कोरोना नाम की महामारी ने हमे भले ही झकझोर कर दिया था लेकिन इकोनॉमी और मानव समाज के लिए यह किसी वरदान से कम नही थी।

 मार्केट ओवर वैल्यूड होता है लेकिन यह अभी नही है । अगर यह पिछले 5-7 वर्षों से लगातार बढ़ रहा होता तो जरूर यह ओवर वैल्यूड कहा जा सकता था। जब इकॉनमी भी 5-7 वर्षो से अंडर वैल्यूड ही है तो मार्केट ओवर वैल्यूड कहाँ से हो सकता है।

क्या मार्केट यहाँ से गिरेगा या और ऊपर जायेगा ?

 जिस प्रकार संसार मे सभी व्यक्ति एक समान नही होते , सभी की सोच अलग अलग होती है सभी का कामकाज अलग अलग होता है उसी प्रकार इकोनॉमी में भी सभी कंपनियों का कामकाज विभिन्न प्रकार का होता है कुछ कंपनियां 50% का प्रॉफिट प्रति वर्ष जनरेट करती है तो कुछ 5% तो कुछ लॉस भी प्रदर्शित करती है इसका मतलब यह कदापि नही होता कि सम्पूर्ण इकॉनमी ही खराब हो गयी है।

हम केवल जीडीपी के आंकड़े देखते है जो हमें एक विस्तृत जनरल पिक्चर दिखाते है। बाजार में कई कंपनियां आई और चली गई लेकिन लेकिन कई कंपनियों ने इतिहास बना दिया , इस दौरान जीडीपी के आंकड़े तो सब के लिए समान ही थे ना फिर यह अंतर क्यों ।

जहाँ तक शेयर मार्केट का सवाल है इसका तो काम ही उतार चढ़ाव दिखाना  है अगर यह एक समान चाल से चलने लगे तो फिर तो सब कुछ पहले से तय मानदंडो के हिसाब से ही होगा। आने वाला कल कैसा होगा इसका जवाब किसी के पास नही होता इसीलिए शेयर मार्किट अनिश्चितताओं से भरा हुआ होता है। 

हाँ यह सच है कि शेयर मार्किट इकोनॉमी का दर्पण होता है इसमें ठीक वैसा ही होगा जो इकोनॉमी में होता है जैसी इकोनॉमी वैसा ही शेयर बाजार। लेकिन इसमें थोड़ा अंतर होता है जो हमे कम ही दिखाई  देता है । शेयर मार्केट जो है वो इकोनॉमी से दो कदम आगे चलता है इकोनॉमी में जो होने वाला होता है वो शेयर मार्केट पहले से ही भांप लेता है । तभी तो कभी कभी हम कह देते है कि इकॉनमी तो दौड़ रही है लेकिन मार्केट गिर रहे है या इकॉनमी की तो हालत खराब है और मार्केट आसमान छू रहे है वस्तुतः वह हमें कुछ महीनों या वर्षो की आगे की तस्वीर देखने को मिल रही है जो हमे जीडीपी के आंकड़े या इकॉनमी तुरन्त नही बताती है वो आने वाले समय में बताती है।

सन 2011 से 2014 बे बीच मार्केट में गिरावट ही थी जबकि जीडीपी के आंकड़ों में बढ़ोतरी थी तभी तो 2014 से 2018 के जीडीपी के आंकड़ों में गिरावट होने के बावजूद शेयर मार्केट बढ़े थे। उसके बाद 2018 से इकॉनमी मंदी की चपेट में आ गयी और 2020 में तो ऋणात्मक जीडीपी देखने को मिली , जिसे मार्केट ने 2018 से 2020 बे बीच पचा लिया था। अब जब इकॉनमी में 2022 - 23  तक डबल डिजिट में आने की उम्मीद जतायी जा रही है तो मार्केट भी इन्ही आंकड़ो के दम पर ऊपर जाने की कोशिश करेगा। मार्केट हमेशा एट प्रेजेंट इकोनॉमी में क्या चल रहा है उस पर रियेक्ट नही करता है बल्कि आने वाले वर्षों में इकॉनमी कैसी रहेगी उसके आधार पर अपना रास्ता तय करता है।

शेयर बाजार गैप अप या गैप डाउन क्यों ओपन होता है?

  बहुत ही अच्छा प्रश्न है जो ज्यादातर उन निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करता है जो बाजार में बिल्कुल नए हैं और शेयर बाजार को ज्यादा अच्छे से नह...